Smriti Irani Story: बचपन का दर्द, मां को घर से निकाले जाने का सच

Smriti Irani Story में सामने आया वो सच जिसने सबको झकझोर कर रख दिया—सिर्फ 7 साल की उम्र में उन्होंने देखा अपनी मां को घर से निकाला जाता हुआ।

Smriti Irani Childhood Story with Mother Painful Moment

बचपन का तूफान: 7 साल की उम्र में टूटी थी मासूमियत
Smriti Irani Story का वो पल जिसने उन्हें अंदर से झकझोर दिया—सिर्फ सात साल की उम्र में उन्होंने अपनी मां को बेघर होते देखा। वजह? सिर्फ इसलिए क्योंकि उनकी मां बेटा नहीं पैदा कर सकीं।

टीवी से संसद तक: संघर्ष से भरी एक यात्रा
‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से राजनीति तक का सफर तय करने वालीं स्मृति ईरानी की कहानी उतनी ही प्रेरणादायक है जितनी दर्दनाक। मॉडलिंग से करियर शुरू कर 1998 में ‘आतिश’ से टीवी में कदम रखा और 2000 में घर-घर में पहचान बनाई।

Smriti Irani Childhood Story with Mother Painful Moment

🎙️ शो में खुलासा: करण जौहर के सामने फूटा दर्द
करण जौहर के शो ‘मोजो’ में स्मृति ने अपनी जिंदगी के सबसे दर्दनाक लम्हे साझा किए। जब करण ने गानों के ज़रिए उनकी लाइफ को समझने को कहा, तो उन्होंने कहा—“मेरी लाइफ कुछ कुछ होता है से शुरू होकर अग्निपथ बन गई।”


🔥 अग्निपथ मोमेंट: मां के लिए लड़ी एक बेटी
स्मृति ने बताया कि अग्निपथ फिल्म की तरह उन्होंने भी अपनी मां के लिए संघर्ष किया। जिस तरह फिल्म में बेटा अपनी मां की खातिर खून-पसीना बहाता है, वैसा ही उन्होंने भी महसूस किया—एक बच्ची की तड़प, जिसे अपनी मां को वापस लाना था।


🏠 जब छीन ली गई मां की छत
उन्होंने बताया, “मैं सात साल की थी जब मेरी मां को घर से निकाल दिया गया, क्योंकि उनके बेटे नहीं थे। वो मेरे लिए अग्निपथ मोमेंट था—तब मैंने ठान लिया था कि एक दिन मां को उनका हक वापस दिलाऊंगी।”

Smriti Irani Childhood Story with Mother Painful Moment

📌 निजी जीवन: एक साधारण लड़की की असाधारण कहानी
23 मार्च 1976 को दिल्ली में जन्मीं स्मृति का असली नाम स्मृति मल्होत्रा है। उनके पति जुबीन ईरानी हैं और उनके तीन बच्चे हैं। एक बहू, एक नेता और एक बेटी की कहानी में संघर्ष की गहराई साफ दिखती है।

Related Posts

पिता-पुत्र की दर्दनाक मौत श्योपुर: खेत में जल समाधि की हिला देने वाली तस्वीरें

पिता-पुत्र की दर्दनाक मौत श्योपुर में खेत के बीच, पार्वती नदी की बाढ़ ने छीन लिया पूरा संसार… 💔 मौत से पहले आखिरी कोशिश श्योपुर जिले के आमलदा गांव में एक पिता ने बेटे को बचाने के लिए मौत से लड़ाई लड़ी, लेकिन नियति कुछ और ही चाहती थी। पार्वती नदी के उफान में दोनों खेत में ही फंस गए। तस्वीरें चीख-चीखकर बयां करती हैं कि पिता ने अंतिम सांस तक बेटे को बचाने की हरसंभव कोशिश की। 🧑‍🌾 किसान की नियति या काल का प्रहार? राजू यादव और उनका बेटा शिवम खेत की रखवाली में जुटे थे, जब अचानक पार्वती नदी ने अपना रौद्र रूप दिखाया। किसान जो दिन-रात खेत में मेहनत करता है, वही खेत कभी उसका काल भी बन जाता है। बिजली, बाढ़, कीट—हर पल एक नया खतरा। 🕳 दो रातों से लापता, आज मिली दर्दनाक सच्चाई परसों रात से परिवार उन्हें ढूंढ रहा था, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। आज सुबह, वही खेत उनके लिए श्मशान बन चुका था। दोनों के शव पास-पास पड़े थे—इस बात की गवाही देते हुए कि वे आखिरी पल तक एक-दूसरे से जुदा नहीं हुए। 🖼 एक तस्वीर, जो बोलती है हजारों शब्द यह दृश्य केवल मौत की त्रासदी नहीं, एक पिता की ममता, हिम्मत और पुत्र के प्रति प्रेम की जीवित मिसाल है। यह तस्वीर विचलित करती…

Continue reading
एक मिशन, 14 दिन व तीन आतंकी ढेर; क्यों नाम रखा गया Operation Mahadev? जवानों ने ऑपरेशन को कैसे दिया अंजाम

 जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में सुरक्षाबलों ने पहलगाम हमले का बदला ले लिया। ऑपरेशन महादेव के तहत सुरक्षाबलों ने पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड सुलेमान शाह उर्फ हाशिम मूसा को मार गिराया। मुठभेड़ में तीन आतंकवादी मारे गए। सेना ने कैसे ऑपरेशन महादेव की योजना बनाई कई दिनों पहले ही इस ऑपरेशन की तैयारी हो गई थी। इस ऑपरेशन का नाम जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर स्थित महादेव चोटी के नाम पर रखा गया था। आतंकवादी महादेव चोटी की तलहटी में घने जंगलों में छिपे हुए थे। सुरक्षा बल इलेक्ट्रोनिक उपकरण से लगातार निगरानी कर रहे थे। सेना को जुलाई की शुरुआत में ही संदिग्ध संदेश मिले थे। ऐसे पकड़े गए आतंकी बता दें कि सुरक्षा बलों को चीनी अल्ट्रा-रेडियो संचार के एक्टिव होने की खबर मिली। इसके बाद सेना के जवानों ने यह ऑपरेशन शुरू किया। लश्कर एन्क्रिप्टेड संदेशों के लिए चीनी रेडियो का इस्तेमाल करता है। यह चोटी काफी ऊंचाई पर है, जहां आतंकवादियों को जंगल युद्ध का प्रशिक्षण दिया जाता है। सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन को अंजाम देने से पहले 14 दिनों तक लश्कर और जैश के आतंकवादियों पर नजर रखी। पाकिस्तान के इशारे पर किया था हमला सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, सुलेमानी ने पहलगाम हमले को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ और लश्कर के अपने हैंडलर सज्जाद और काजी सैफ के निर्देश पर अंजाम दिया था। वह दोनों के…

Continue reading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error

Enjoy this blog? Please spread the word :)

Follow by Email
Instagram
WhatsApp